स्वयं डाॅ आंबेडकर ने महर्षि दयानंद व उनके अनुयायियों के वैदिक वर्णव्यवस्था को समझकर समाज सुधार करने की प्रशंसा की हैं Annihilation of Caste, with a Reply to The Mahatma इस लेख मे। महात्मा गांधी ये जन्मना वर्णव्यवस्था के समर्थक थे (स्वयं अपने जन्माधारित जाती के व्यवसाय व्यापार के बजाए वकिली के व्यवसाय मार्ग पर चलने के बावजूद) और इनके विरुद्ध डाॅ आंबेडकर ने महात्मा को उत्तर मे लिखा है की महात्मा गांधी वर्ण और जाती को एक ही मानते है जबकी वैदिक वर्णव्यवस्था केवल कर्माधारित थी और महर्षि दयानंद व उनके अनुयायी ये ठिक से समझ पाए है। उन्होंने ये भी कहा की महर्षि दयानंद या स्वामी दयानंद के वेदोक्त वर्णव्यवस्था मे कोई आपत्ति या विवादास्पद नही है क्यों की इसमे जन्म व कुल का कोई लेना देना ही नही, केवल कर्म और गुणों पर आधारित हैं इसिलिए वह बुद्धिपूर्ण है। [31:] It is good that he has repudiated this sanctimonious nonsense and admitted that Caste "is harmful both to spiritual and national growth," and maybe his son's marriage outside his caste has had something to do wit...
Traditionalist Perennial Philosopher