Research Paper by Dr. Chaiyong Brahmawong, Ph.D.
Senior Professor, Sukhothai Thammathirat Open University, Thailand.
Translated into Hindi by Brahmaveer Rigvedi.
Link to the PDF version of original research paper:-
https://www.google.com/url?sa=t&source=web&rct=j&url=http://www.buddhabirthplace.net/pdf/budhasumeng.pdf&ved=2ahUKEwiXovT9qrDlAhXl6nMBHct0C9AQFjALegQICBAB&usg=AOvVaw2Ye0pZD7yV9cWJMRNI1eDM
"इतिहास याने वो जो हम जानते है, यदी हमारी जानकारी गलत होगी, तो इतिहास गलत होगा!" ये बयान संभवतः बौद्ध धर्म के इतिहास के विषय मे सत्य है।
"दो सौ साल पहले भारत एक ऐसा जगह माना जाता था जिसका इतिहास बहोत छोटा था और संस्कृति मे काफी हीन थी। परंतु आज प्रसिद्ध अतिप्राचीन इतिहास के लिए, एक बेहतरीन व प्रतिष्ठित संधिकाल के लिए और एक ऐसे सांस्कृतिक परंपरा जो लक्षणों व निरंतरता मे अनोखा है, इन केलिए भारत वंदनीय है।" ऐसे हार्परकाॅलीन्स (HarperCollins) प्रकाशित, जाॅन किए कृत India Discovered: The Recovery of a Lost Civilization इस पुस्तक के पिछे के आवरण पर लिखा है।
किए कृत इसी पुस्तक मे पान क्रमांक ६६-६७ पर लिखा है की, "सन् १६८७ के सियाम के फ्रेंच राजदूत श्री सीमन दी ला लिबेरे अनुसार, यह थाई देवता, पउत या कोदम (बुद्ध या गोतम), भारत मे हजारों वर्षों के लिए पूजा गया था। विलियम चेंबर्ज जिन्होंने सब से पहले महाबलिपुरम के मंदिरो पर संशोधन किया था, उन्होंने थाईलैंड या सियाम के फ्रेंच लेख पढ कर ये महत्वपूर्ण शोध लगाया की थाई देवता पउत या कोदम ये भारत मे हजारों वर्षों तक पुजा जाता था।"
पर भारत को विश्व संस्कृति का केन्द्र कैसे बनाया गया और थाई देवता याने बुद्ध व बौद्ध धर्म को कैसे सुवण्णभुमी (स्वर्णभुमी याने आज के थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया, बर्मा और रमन जहा स्थित है) से लाया गया? क्यों वहा भारत मे इस धर्म के बारे मे कोई नही जानता? क्यों वहा कोई इनके प्राचीन ग्रंथों के बारे मे नही जानता?
इनका उत्तर जाॅन किए ने बेखुबी से संग्रहित व प्रस्तुत किए विभिन्न दस्तावेजों से मिलता है।
अध्याय "The Legacy of Pout" मे जाॅन किए ने कप्तान इ. फेल के लेखों का उल्लेख किया है जो कई बार सांची जा कर ऐसा निरिक्षण करते है की वहा के अप्रतिम पाषाण-उत्कीर्णन, जिसपर किसी धर्म संप्रदाय संबंधित कथाएं दर्शाए है इसिलिए सांची को बौद्ध मान लिया।
इस पर किए पुछते है, "यदी सांची बौद्ध स्थल है तो बुद्ध के अनुयायी कहाँ गये?"
"उत्तर है लगभग हर जगह", किए ने कहा। "लदाख, तिब्बत, नेपाल, चीन, बर्मा, थाईलैंड, श्री लंका- सिवाय भारत। बौद्ध मत ने पुरे उपमहाद्वीप को निघल लिया था, सिवाय भारत- जहा किसी को भी इस मत के बारे मे नही पता था।"
बौद्ध धर्म के बारे मे भारत मे कोई क्यों नही जानता था? इसका उत्तर है क्यों की भारत मे बौद्ध धर्म का प्रारंभ हुआ ही नही था। वह भारत देश बहुसंख्या मे हमेशा से हिंदु धर्म के अधिन था। कलाकार विलियम सिम्पसन का आभार जो उन्होंने सांची स्तूप के जल रंगीन चित्र (१८६२) तयार किए जिसके आधार पर हमने इन स्तूपों पर विश्लेषण किया है की ये बौद्ध स्तूप बिलकुल हो ही नही सकते। स्तूप के द्वार पर जो शिल्पकलाए है उन पर गौर करके कम से कम एक नग्न स्त्री की शिल्प तो मिलती ही है। यदी यह स्तूप सच मे बौद्ध होता तो यहा अश्लील व नग्न स्त्री व पुरुषों के मुर्गियाँ होने की अनुमति ही नही होती। स्पष्ट है की सांची स्तूप कदापि बौद्ध नही हो सकते।
To be continued...
(The post would be updated and new parts would be added subsequently)
(यह पोस्ट पर नये नये भाग समयांतर मे जोड़े जायेंगे)
Senior Professor, Sukhothai Thammathirat Open University, Thailand.
Translated into Hindi by Brahmaveer Rigvedi.
Link to the PDF version of original research paper:-
https://www.google.com/url?sa=t&source=web&rct=j&url=http://www.buddhabirthplace.net/pdf/budhasumeng.pdf&ved=2ahUKEwiXovT9qrDlAhXl6nMBHct0C9AQFjALegQICBAB&usg=AOvVaw2Ye0pZD7yV9cWJMRNI1eDM
"इतिहास याने वो जो हम जानते है, यदी हमारी जानकारी गलत होगी, तो इतिहास गलत होगा!" ये बयान संभवतः बौद्ध धर्म के इतिहास के विषय मे सत्य है।
"दो सौ साल पहले भारत एक ऐसा जगह माना जाता था जिसका इतिहास बहोत छोटा था और संस्कृति मे काफी हीन थी। परंतु आज प्रसिद्ध अतिप्राचीन इतिहास के लिए, एक बेहतरीन व प्रतिष्ठित संधिकाल के लिए और एक ऐसे सांस्कृतिक परंपरा जो लक्षणों व निरंतरता मे अनोखा है, इन केलिए भारत वंदनीय है।" ऐसे हार्परकाॅलीन्स (HarperCollins) प्रकाशित, जाॅन किए कृत India Discovered: The Recovery of a Lost Civilization इस पुस्तक के पिछे के आवरण पर लिखा है।
India Discovered: The Recovery Of A Lost Civilization. Keay, John.
ISBN: 9780007123001
किए कृत इसी पुस्तक मे पान क्रमांक ६६-६७ पर लिखा है की, "सन् १६८७ के सियाम के फ्रेंच राजदूत श्री सीमन दी ला लिबेरे अनुसार, यह थाई देवता, पउत या कोदम (बुद्ध या गोतम), भारत मे हजारों वर्षों के लिए पूजा गया था। विलियम चेंबर्ज जिन्होंने सब से पहले महाबलिपुरम के मंदिरो पर संशोधन किया था, उन्होंने थाईलैंड या सियाम के फ्रेंच लेख पढ कर ये महत्वपूर्ण शोध लगाया की थाई देवता पउत या कोदम ये भारत मे हजारों वर्षों तक पुजा जाता था।"
पर भारत को विश्व संस्कृति का केन्द्र कैसे बनाया गया और थाई देवता याने बुद्ध व बौद्ध धर्म को कैसे सुवण्णभुमी (स्वर्णभुमी याने आज के थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया, बर्मा और रमन जहा स्थित है) से लाया गया? क्यों वहा भारत मे इस धर्म के बारे मे कोई नही जानता? क्यों वहा कोई इनके प्राचीन ग्रंथों के बारे मे नही जानता?
इनका उत्तर जाॅन किए ने बेखुबी से संग्रहित व प्रस्तुत किए विभिन्न दस्तावेजों से मिलता है।
अध्याय "The Legacy of Pout" मे जाॅन किए ने कप्तान इ. फेल के लेखों का उल्लेख किया है जो कई बार सांची जा कर ऐसा निरिक्षण करते है की वहा के अप्रतिम पाषाण-उत्कीर्णन, जिसपर किसी धर्म संप्रदाय संबंधित कथाएं दर्शाए है इसिलिए सांची को बौद्ध मान लिया।
इस पर किए पुछते है, "यदी सांची बौद्ध स्थल है तो बुद्ध के अनुयायी कहाँ गये?"
"उत्तर है लगभग हर जगह", किए ने कहा। "लदाख, तिब्बत, नेपाल, चीन, बर्मा, थाईलैंड, श्री लंका- सिवाय भारत। बौद्ध मत ने पुरे उपमहाद्वीप को निघल लिया था, सिवाय भारत- जहा किसी को भी इस मत के बारे मे नही पता था।"
बौद्ध धर्म के बारे मे भारत मे कोई क्यों नही जानता था? इसका उत्तर है क्यों की भारत मे बौद्ध धर्म का प्रारंभ हुआ ही नही था। वह भारत देश बहुसंख्या मे हमेशा से हिंदु धर्म के अधिन था। कलाकार विलियम सिम्पसन का आभार जो उन्होंने सांची स्तूप के जल रंगीन चित्र (१८६२) तयार किए जिसके आधार पर हमने इन स्तूपों पर विश्लेषण किया है की ये बौद्ध स्तूप बिलकुल हो ही नही सकते। स्तूप के द्वार पर जो शिल्पकलाए है उन पर गौर करके कम से कम एक नग्न स्त्री की शिल्प तो मिलती ही है। यदी यह स्तूप सच मे बौद्ध होता तो यहा अश्लील व नग्न स्त्री व पुरुषों के मुर्गियाँ होने की अनुमति ही नही होती। स्पष्ट है की सांची स्तूप कदापि बौद्ध नही हो सकते।
To be continued...
(The post would be updated and new parts would be added subsequently)
(यह पोस्ट पर नये नये भाग समयांतर मे जोड़े जायेंगे)

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